प्राणविसावा लहरि सजण,Pran Visava Lahari Sajan

प्राणविसावा ! लहरि सजण कुणि दावा !
फिरुन घरि यावा
पावसाची हवा
ओढ लावी जिवा
शितळ शिडकावा ! प्राणविसावा !

कठिण दुरावा, सहन अजुन किति व्हावा
धरुन धिरावा ?
प्राण वेडापिसा
एकलीने कसा
समय गुजारावा ? प्राणविसावा !

बहर फुलावा, फुलुन फुलुन विखरावा

हृदयि धरावा
कळ्या-पाकळ्या
पाहता मोकळ्या
भरुन उर यावा ! प्राणविसावा !

विरहि झुरावा, झुरत झुरत जिव जावा
कितिक जपावा ?
नव्या नवतीतली
नार मी एकली,
जाउन समजावा ! प्राणविसावा !