देवता कामुकता रहिता,Devata Kamukata Rahita
देवता कामुकता रहिता । कां न होय कार्य वरद ॥
जी रुसते प्रेमलता । शांतकाल पाहता । कालगुणे कठिण बने ।
धांवे निजबले परि हरि भया । निरामया करित ॥
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